🔱 विज्ञान भैरव तंत्र के 10 गुप्त श्वास सूत्र — शिव की प्राण साधना

🔱 विज्ञान भैरव तंत्र के 10 गुप्त श्वास सूत्र — शिव की प्राण साधना

विज्ञान भैरव तंत्र में भगवान शिव पार्वती को 112 ध्यान विधियाँ बताते हैं।
इनमें से कई अत्यंत सूक्ष्म और शक्तिशाली श्वास (प्राण) आधारित सूत्र हैं।

ये “गुप्त” इसलिए कहे गए क्योंकि इन्हें केवल पढ़ना पर्याप्त नहीं —
इन्हें अनुभव में उतारना पड़ता है।


🔹 1. श्वास के मध्य का शून्य

“श्वास के प्रवेश और निर्गमन के बीच के विराम में स्थित हो जाओ।”

अभ्यास:

सांस अंदर जाए

सूक्ष्म विराम को देखें

सांस बाहर जाए

फिर विराम को देखें

👉 यही विराम भैरव का द्वार है।


🔹 2. श्वास के आरंभ और अंत का बिंदु

जब सांस शुरू होती है और जब पूरी तरह समाप्त होती है,
उन बिंदुओं को पकड़ें।

वहीं मन रुकता है।


🔹 3. नासिका द्वार पर चेतना

सांस के स्पर्श को नासिका पर अनुभव करें।
ठंडक (अंदर) और गर्माहट (बाहर)।

धीरे-धीरे मन सूक्ष्म हो जाएगा।


🔹 4. श्वास को प्रकाश की तरह अनुभव करना

कल्पना नहीं — अनुभव करें कि
सांस के साथ एक ऊर्जा-प्रवाह भीतर प्रवेश कर रहा है।

उसे पूरे शरीर में फैलता देखें।


🔹 5. “मैं” को श्वास में विलीन करना

सांस अंदर जाए → “मैं” भी अंदर
सांस बाहर जाए → “मैं” भी बाहर

धीरे-धीरे कर्ता भाव मिटने लगता है।


🔹 6. तीव्र श्वास के बाद शांति

कुछ क्षण तेज सांस लें
फिर अचानक छोड़ दें
और उत्पन्न शांति में स्थित हो जाएँ।

अचानक मौन प्रकट होगा।


🔹 7. भय या आश्चर्य के क्षण में श्वास रोकना

जब अचानक झटका या आश्चर्य हो,
एक क्षण के लिए सांस ठहरती है।

उस ठहराव में प्रवेश करें —
वही शुद्ध चेतना है।


🔹 8. श्वास को ऊपर उठती ऊर्जा के रूप में देखना

सांस अंदर → ऊर्जा मूलाधार से सहस्रार तक
सांस बाहर → सहस्रार से नीचे

यह सुषुम्ना को सक्रिय करता है।


🔹 9. श्वास को अनंत आकाश में विलीन होते देखना

सांस बाहर जाए
और कल्पना नहीं, अनुभव करें कि
वह अनंत में खो गई।

मन भी उसके साथ खो जाएगा।


🔹 10. श्वास का साक्षी बन जाना

कुछ मत करो।
सांस को होने दो।
केवल देखने वाले बनो।

धीरे-धीरे देखने वाला भी विलीन हो सकता है।


🔥 इन सूत्रों का रहस्य

प्रयास कम

जागरूकता अधिक

अनुभव में न उलझना

निरंतरता बनाए रखना

विज्ञान भैरव तंत्र कहता है —
साधना का केंद्र शून्यता में विश्राम है।

🌺

सांस सबसे सरल द्वार है।
वह हर क्षण आपके साथ है।

यदि आप सच में उसे देखना सीख जाएँ,
तो वही आपको
भैरव — परम चेतना तक पहुँचा सकती है।

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