प्रश्न योग के अनुसार क्या मरने के बाद भूख भी लगती है

प्रश्न योग के अनुसार क्या मरने के बाद भूख भी लगती है

बहुत गहरा और रोचक प्रश्न है 🙏 योग के अनुसार इसका उत्तर “हाँ और नहीं – दोनों” है, लेकिन शारीरिक अर्थ में नहीं। चलिए इसे साफ़-साफ़ समझते हैं। 

1️⃣ योग की मूल समझ योग कहता है कि मृत्यु के बाद स्थूल शरीर (जिससे हम खाना खाते हैं) छूट जाता है, लेकिन सूक्ष्म शरीर बना रहता है — जिसमें शामिल हैं: मन प्राण संस्कार वासनाएँ 👉 भूख शरीर की नहीं, इच्छा (वासना) की होती है। 

2️⃣ मृत्यु के बाद “भूख” का अर्थ मरने के बाद रोटी-चावल की भूख नहीं लगती, लेकिन ये अनुभव हो सकते हैं: 🔹 इच्छा की भूख खाने की आदत की स्मृति स्वाद की चाह भोग की वासना योग इसे कहता है: भोग-वासना जहाँ वासना है, वहाँ भूख है।

 3️⃣ प्रेत अवस्था में क्या होता है? (योगिक दृष्टि) योग और तंत्र के अनुसार: जिनकी वासनाएँ अधूरी होती हैं जिनका मन भोजन, काम, लोभ में अटका होता है उनका सूक्ष्म शरीर: खाने की इच्छा करता है पर तृप्ति नहीं मिलती इसी कारण कुछ ग्रंथ कहते हैं: “प्रेत को गंध से तृप्ति होती है, पदार्थ से नहीं।”

5️⃣ लेकिन मुक्त योगी को? जिसने जीवन में: वासनाओं को जला दिया भोजन को केवल शरीर का साधन माना साक्षी भाव में जिया उसके लिए: ❌ मृत्यु के बाद कोई भूख नहीं ❌ कोई चाह नहीं ❌ कोई भटकन नहीं 👉 वह सीधे उच्च लोक या मोक्ष मार्ग में प्रवेश करता है। 

6️⃣ एक गूढ़ योग सूत्र भूख शरीर की नहीं, पहचान की होती है। जहाँ “मैं” है, वहाँ भूख है।

जहाँ “मैं” मिट गया, वहाँ तृप्ति है। अवस्था भूख होती है? अवस्था भूख होती है? जीवित शरीर हाँ ( स्थूल) अवस्था भूख होती है? मृत्यु के बाद हाँ (इच्छा रूप में) अवस्था भूख होती है? प्रेत अवस्था वासना की भूख अवस्था भूख होती है? योगी / मुक्त नहीं

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