विज्ञान भैरव तंत्र में साक्षी भावदेखने की साधना से भैरव-चेतना तक

 विज्ञान भैरव तंत्र में साक्षी भाव देखने की साधना से भैरव-चेतना तक भूमिका विज्ञान भैरव तंत्र कोई दर्शन ग्रंथ नहीं, बल्कि 112 प्रत्यक्ष ध्यान विधियों का संकलन है। इन सभी विधियों के केंद्र में एक ही तत्व छिपा है

 साक्षी भाव। भगवान शिव पार्वती से कहते हैं कि > जब साधक देखने वाला बन जाता है, तभी वह भैरव होता है।

 साक्षी भाव क्या है – विज्ञान भैरव तंत्र के अनुसार विज्ञान भैरव तंत्र में साक्षी का अर्थ है — हर अनुभव को बिना हस्तक्षेप देखना। श्वास को देखना विचार को देखना भावना को देखना सुख-दुःख को देखना 👉 बिना रोके 👉 बिना पकड़े 👉 बिना बदले यही तंत्र का मूल सूत्र है। 

112 ध्यान विधियाँ और साक्षी भाव विज्ञान भैरव तंत्र की लगभग सभी विधियाँ साक्षी को जन्म देती हैं, जैसे — श्वास के आने-जाने को देखना दो विचारों के बीच के अंतराल को देखना जागरण, स्वप्न और निद्रा के बीच के क्षण को देखना क्रोध, भय, आनंद की तीव्र अवस्था को देखना इन सबमें देखना मुख्य है, करना नहीं।

क्यों तंत्र में साक्षी सबसे महत्वपूर्ण है? क्योंकि — जो करता है, वह बंधन में है जो भोगता है, वह दुखी होता है जो देखता है, वह मुक्त होता है विज्ञान भैरव तंत्र कहता है: > जब देखने वाला शुद्ध होता है, तब वही भैरव है। 


विज्ञान भैरव के कुछ प्रमुख साक्षी सूत्र 🔱 श्वास-साक्षी शिव कहते हैं — श्वास नासिका से भीतर जाती है, बाहर आती है — उसे बदले बिना देखो। जहाँ देखने वाला टिकता है, वहीं चेतना खुलती है। 

🔱 विचार-साक्षी दो विचारों के बीच जो शून्य है, उसे देखो। वही शून्य भैरव का द्वार है।

 🔱 भावना-साक्षी जब क्रोध, भय या आनंद तीव्र हो — उसे दबाओ मत, उसे बहाओ मत, बस देखो। उस क्षण में चेतना छलांग लगाती है। 

साक्षी और भैरव-चेतना विज्ञान भैरव तंत्र में अंतिम लक्ष्य “मोक्ष” नहीं कहा गया। शिव उसे कहते हैं — भैरव-भाव। जब — देखने वाला स्थिर हो देखी जाने वाली वस्तुएँ गिर जाएँ देखने और देखे का भेद मिट जाए तब साधक स्वयं भैरव हो जाता है। 

साधकों के लिए एक गुप्त संकेत 🔥 > जिसे तुम देख सकते हो — वह तुम नहीं हो। जिसे तुम नहीं देख सकते — वही भैरव है। यदि यह बात ध्यान में उतर जाए, तो 112 विधियाँ अपने आप सरल हो जाती हैं।

विज्ञान भैरव तंत्र में साक्षी का फल साक्षी भाव के फल स्वरूप — मन स्वतः शांत होता है विचारों की पकड़ टूटती है भय और मृत्यु का डर गलने लगता है सहज करुणा प्रकट होती है यही तंत्र की सिद्धि है। 

 विज्ञान भैरव तंत्र सिखाता है कि कुछ जोड़ना नहीं है, केवल देखना है। जब देखने वाला जागता है, तभी शिव प्रकट होते हैं। 









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