योगदर्शन के अनुसार ईश्वर कौन है?

योग दर्शन के अनुसार ईश्वर कौन हैं?

योग दर्शन में ईश्वर को एक विशेष पुरुष माना गया है, जो क्लेशों, कर्मों और उनके फलों से सर्वथा परे हैं। महर्षि पतंजलि के योगसूत्र के अनुसार ईश्वर नित्य, सर्वज्ञ और पूर्णतः मुक्त चेतना हैं। वे जन्म-मृत्यु के बंधन से परे हैं तथा समस्त ज्ञान के आदि गुरु हैं।

पतंजलि कहते हैं कि ईश्वर का स्मरण और प्रणिधान साधक के मन को स्थिर एवं निर्मल बनाता है। ईश्वर-प्रणिधान के द्वारा साधक अहंकार, आसक्ति और मानसिक विक्षेपों से मुक्त होकर आत्म-साक्षात्कार की ओर अग्रसर होता है।

योग दर्शन में ईश्वर किसी संप्रदाय विशेष तक सीमित नहीं हैं। वे शुद्ध चेतना और परम मार्गदर्शक के रूप में प्रत्येक साधक के लिए उपलब्ध हैं। अतः योग का मार्ग हमें बाहरी आडंबरों से ऊपर उठकर अपने भीतर स्थित दिव्य चेतना का अनुभव करने की प्रेरणा देता है।

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