पतंजलि योगदर्शन: मनुष्य को आत्मा से जोड़ने वाला दिव्य शास्त्र”

“पतंजलि योगदर्शन: मनुष्य को आत्मा से जोड़ने वाला दिव्य शास्त्र”

पतंजलि योगदर्शन

कोई साधारण पुस्तक नहीं है…

यह मनुष्य के मन का विज्ञान है।


योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः


पतंजलि कहते हैं—

योग कोई क्रिया नहीं,

योग कोई प्रदर्शन नहीं,

योग कोई दिखावा नहीं।


योग तो मन की अशांति का अंत है।


जब मन भागना बंद कर देता है,

जब विचार शांत हो जाते हैं,

तभी मनुष्य अपने असली स्वरूप में टिकता है।


पतंजलि ने मन को शत्रु नहीं कहा,

उन्होंने मन को संयम का विषय बनाया।


मन को दबाना योग नहीं,

मन को समझ लेना योग है।


यही पतंजलि की महानता है।


पतंजलि योगदर्शन सिखाता है—


> दुख से भागो मत,

मन को जानो।




> परिस्थितियाँ नहीं,

हमारी वृत्तियाँ हमें बांधती हैं।



शाश्वत सत्य:


जब चित्त शांत होता है,

तो मनुष्य न दुखी होता है,

न सुख में बंधता है।


वह स्वयं में स्थित हो जाता है।


यही योग है।

यही पतंजलि का संदेश है।


पतंजलि योगदर्शन

मनुष्य को सचेत मनुष्य बनाता है।


और सचेत मनुष्य

कभी भटकता नहीं।


जैसे हवा चलती रहे

तो दीपक कांपता है,

लेकिन हवा रुकते ही

दीपक स्थिर जलता है।


वैसे ही,

विचारों की हवा रुकते ही

आत्मा का प्रकाश प्रकट होता है।


यदि यह आपको स्पर्श करे,

तो योग को केवल पढ़िए नहीं…

जीवन में उतारिए।


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