श्रीमद्भगवद्गीता की सबसे 13 महत्वपूर्ण बातें
1 कर्म करो, फल छोड़ दो
“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन”
👉 हमें अपना कर्म ईमानदारी से करना चाहिए, फल की चिंता नहीं करनी चाहिए।
2 आत्मा अमर है
शरीर नष्ट होता है, लेकिन आत्मा कभी नहीं मरती।
3 मृत्यु का डर छोड़ो
जो मरता है वह शरीर है, आत्मा नहीं।
4 हर परिस्थिति में समभाव रखो
सुख-दुख, लाभ-हानि, जीत-हार में मन को स्थिर रखना ही योग है।
5 सच्चा योग = मन पर नियंत्रण
योग सिर्फ आसन नहीं, मन को काबू में रखना असली योग है।
6 जैसा कर्म, वैसा फल
हर कार्य का परिणाम हमें ही भोगना पड़ता है।
7 डर मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है
डर हमें सही कर्म करने से रोकता है।
8 भगवान हर जगह हैं
ईश्वर हर जीव के हृदय में निवास करते हैं।
9 भक्ति सबसे सरल मार्ग है
सच्चे दिल से की गई भक्ति से ईश्वर तुरंत प्रसन्न होते हैं।
10 काम, क्रोध, लोभ — नरक के द्वार हैं
ये तीनों जीवन को नष्ट कर देते हैं।
11 संतोष सबसे बड़ा धन है
जिसे संतोष है, वही वास्तव में धनी है।
12 मन ही मित्र है, मन ही शत्रु
अच्छा मन मित्र बनता है, बुरा मन शत्रु।
13 सच्चा सुख भीतर से आता है
बाहर की वस्तुएँ स्थायी सुख नहीं दे सकतीं।
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