Nature
_Travel
Home
Beautifull
_Shiva
_Live
DMCA
Contact Us
Privacy policy
Disclaimer
Home
_Shiva
_Live
DMCA
Home
geeta
उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥
उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥
Sonu Kumar
January 17, 2026
उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥
अर्थ:
👉 मनुष्य खुद ही अपना मित्र भी है और शत्रु भी।
2.जन्म–मृत्यु का रहस्य
श्लोक (2.20):
न जायते म्रियते वा कदाचित्
नायं भूत्वा भविता वा न भूयः।
अर्थ:
👉 आत्मा न कभी जन्म लेती है, न कभी मरती है।
Bye Geeta Book
Post a Comment
0 Comments
Social Plugin
Popular Posts
Why Diversifying Your Crypto Portfolio Matters
July 09, 2026
ट्रू बैलेंस से मिनटों में पाएं तत्काल पर्सनल लोन – जानिए कैसे
August 12, 2026
योगदर्शन के अनुसार ईश्वर कौन है?
July 09, 2026
0 Comments