विज्ञान भैरव तंत्र में मौन की शक्ति
मनुष्य प्रतिदिन हजारों शब्द बोलता है और उससे भी अधिक विचार उसके मन में चलते रहते हैं। शब्दों और विचारों की इस निरंतर धारा में वह अपने भीतर के मौन को लगभग भूल चुका है।
विज्ञान भैरव तंत्र में भगवान शिव मौन को केवल बोलना बंद कर देने की अवस्था नहीं मानते, बल्कि उसे चेतना के गहन अनुभव का द्वार बताते हैं। अनेक ध्यान विधियाँ साधक को इसी आंतरिक मौन की ओर ले जाती हैं।
मौन क्या है?
सामान्य रूप से लोग मौन का अर्थ चुप रहना समझते हैं। लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से मौन का अर्थ कहीं अधिक गहरा है।
सच्चा मौन वह है—
- जहाँ मन शांत हो।
- जहाँ विचारों की पकड़ कम हो जाए।
- जहाँ केवल जागरूकता शेष रह जाए।
- जहाँ अनुभव तो हो, लेकिन मानसिक शोर न हो।
यह मौन बाहर नहीं, भीतर उत्पन्न होता है।
शब्द और मौन का संबंध
भगवान शिव संकेत करते हैं कि हर शब्द मौन से ही जन्म लेता है और अंततः मौन में ही विलीन हो जाता है।
यदि हम ध्यान से देखें—
- ध्वनि के पहले मौन है।
- ध्वनि के बाद भी मौन है।
- शब्दों के बीच भी मौन है।
लेकिन हमारा ध्यान केवल शब्दों पर रहता है, मौन पर नहीं।
ध्यान का उद्देश्य उसी छिपे हुए मौन को पहचानना है।
आंतरिक शोर
बहुत से लोग बाहरी शोर से परेशान होते हैं, लेकिन वास्तविक समस्या अक्सर भीतर का शोर होता है।
- निरंतर चिंताएँ
- भविष्य की कल्पनाएँ
- अतीत की स्मृतियाँ
- इच्छाएँ और भय
ये सब मिलकर मन में अशांति पैदा करते हैं।
जब साधक इन विचारों को केवल देखना शुरू करता है, तब धीरे-धीरे उनके बीच मौन प्रकट होने लगता है।
मौन की ध्यान विधि
एक सरल अभ्यास:
- किसी शांत स्थान पर बैठें।
- आँखें बंद करें।
- आसपास की ध्वनियों को सुनें।
- ध्वनियों को अच्छा या बुरा न कहें।
- ध्वनियों के बीच मौजूद मौन को महसूस करें।
कुछ समय बाद ध्यान ध्वनियों से हटकर मौन पर टिकने लगेगा।
यही अभ्यास भीतर के मौन की ओर ले जा सकता है।
मौन और आत्मज्ञान
विज्ञान भैरव तंत्र के अनुसार परम सत्य शब्दों से परे है।
शब्द केवल संकेत कर सकते हैं, लेकिन सत्य का अनुभव मौन में ही संभव है।
इसीलिए महान ऋषियों ने कहा—
"जिसे शब्द व्यक्त नहीं कर सकते, उसे मौन प्रकट कर देता है।"
जब मन शांत होता है, तब चेतना स्वयं को प्रकट करने लगती है।
दैनिक जीवन में मौन
मौन केवल ध्यान कक्ष तक सीमित नहीं है।
आप इसे अनुभव कर सकते हैं—
- सुबह की शांति में
- प्रकृति के बीच
- प्रार्थना के बाद
- गहरी एकाग्रता के क्षणों में
- किसी सुंदर दृश्य को देखते समय
इन क्षणों में मन कुछ पल के लिए शांत हो जाता है और भीतर का मौन झलकने लगता है।
विज्ञान भैरव तंत्र में मौन को साधना का अत्यंत महत्वपूर्ण आयाम माना गया है।
मौन का अर्थ दुनिया से भागना नहीं, बल्कि अपने भीतर उस स्थान को खोजना है जहाँ विचार, भय और अशांति समाप्त हो जाते हैं।
भगवान शिव हमें सिखाते हैं कि जिस शांति को हम बाहर खोजते हैं, उसका स्रोत हमारे अपने भीतर का मौन है।
"मौन वह भाषा है जिसे आत्मा समझती है।"
"जब मन शांत होता है, तब सत्य स्वयं बोलता है।"
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